
पंजाब को केंद्र की बड़ी सौगात, विकास कार्यों के लिए मिले ₹1970 करोड़; राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने कही बड़ी बात
चंडीगढ़
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ''विकसित भारत संकल्प अभियान'' के तहत ''नशा मुक्ति भारत अभियान'' और ''मन की बात'' कार्यक्रम की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस दौरान हजारों विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री का संबोधन सुना। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के बाद राज्यसभा सांसद और एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल ने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। उन्होंने जोर दिया कि इसमें युवाओं की अहम भूमिका होगी। मित्तल ने कहा कि यदि युवा नशे की गिरफ्त में गए तो विकसित भारत का सपना अधूरा रह जाएगा। उन्होंने बताया कि एलपीयू के ऑडिटोरियम में करीब पांच हजार छात्रों ने प्रधानमंत्री का संबोधन लाइव देखा।
मित्तल ने नशे की समस्या को केवल पंजाब तक सीमित न मानते हुए इसे पूरे देश की चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि देश का करीब हर हिस्सा इस चुनौती से जूझ रहा है इसलिए केंद्र, राज्य सरकारें और समाज के हर वर्ग को मिलकर इस लड़ाई को लड़ना होगा। सीमावर्ती राज्यों में ड्रोन से हो रही नशे की तस्करी पर चिंता जताते हुए मित्तल ने केंद्र सरकार से विशेष एंटी-ड्रोन फोर्स बनाने की मांग की।
पंजाब के विकास और एंटी-ड्रोन फोर्स की मांग
अशोक मित्तल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पंजाब से विशेष जुड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब के विकास कार्यों के लिए 1,970 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिससे सड़क और रेलवे सहित कई परियोजनाओं को गति मिलेगी। मित्तल ने ऐसी तकनीक विकसित करने को कहा, जिससे सीमा पार से आने वाले ड्रोन भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही निष्क्रिय हो जाएं।
राजनीतिक दलों को एकजुटता का संदेश
पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी विवाद पर अशोक मित्तल ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल के लिए अनुशासन, संयम और एकजुटता आवश्यक है। मित्तल ने सभी राजनीतिक दलों से संगठनात्मक एकता बनाए रखने की अपील की।
राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब का हवाला देते हुए तरुण चुघ ने बताया कि अमृतसर में 44 परियोजनाओं पर 1,911 करोड़ रुपये, जालंधर में 78 परियोजनाओं पर 1,186 करोड़ रुपये और लुधियाना में 82 परियोजनाओं पर 1,388 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं में पार्किंग, खेल बुनियादी ढांचा, ठोस कचरा प्रबंधन, जलापूर्ति, हरित क्षेत्रों का विकास और अन्य शहरी सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 तक तीनों शहरों में 204 में से 190 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिन पर 4,148 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह कुल परियोजनाओं का लगभग 93 प्रतिशत है।
तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन और संसाधन उपलब्ध कराए, लेकिन इन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में पंजाब सरकार का अपेक्षित सहयोग और इच्छाशक्ति देखने को नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप भी सामने आते रहे हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से केंद्र द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि का पारदर्शी, योजनाबद्ध और बिना किसी भेदभाव के उपयोग सुनिश्चित करने की अपील की। उनका कहना है कि इससे अमृतसर, जालंधर और लुधियाना का समग्र विकास होगा और लोगों को आधुनिक शहरी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
ऐसे आता है यह पैसा
केंद्र सरकार हर साल आयकर, जीएसटी, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और दूसरे केंद्रीय करों से होने वाली कमाई का एक तय हिस्सा राज्यों को देती है। इसी व्यवस्था के तहत राज्यों को हर महीने राशि जारी की जाती है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, समय से पहले राशि जारी करने का मकसद राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत करना है।
इससे राज्यों के पास विकास कार्यों और पूंजीगत परियोजनाओं के लिए समय पर पैसा उपलब्ध रहेगा। सरकार का कहना है कि इससे सड़क, पुल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम तेजी से आगे बढ़ सकेगा। पंजाब को भी इस अतिरिक्त किश्त में उसके हिस्से की राशि मिली है।
इससे राज्य सरकार को विकास योजनाओं के लिए फंड जुटाने में राहत मिलेगी और पहले से चल रही परियोजनाओं के भुगतान में भी आसानी होगी।
केंद्र सरकार ने क्या कहा?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह अतिरिक्त किस्त राज्यों की विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जारी की गई है। सरकार का मानना है कि समय से पहले पैसा मिलने से राज्य पूंजीगत खर्च बढ़ा सकेंगे, जिससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।




