
एमपी पर मानसूनी सिस्टम मेहरबान: 22 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 27 अगस्त तक जारी रहेगा दौर
भोपाल
मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणालियों के असर से आज 22 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। डिंडोरी और बालाघाट सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जहां 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग ने दोनों जिलों के लिए अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। जबलपुर, मंडला, सिवनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी, दमोह, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल और छतरपुर में भी भारी बारिश की चेतावनी है। इधर रविवार रात भोपाल में तेज बारिश हुई।
तीन दिन तक बना रहेगा बारिश का असर
मानसून की द्रोणिका, चक्रवाती परिसंचरण और निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से बारिश का मजबूत दौर बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 27 अगस्त तक प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। पूर्वी जिलों के साथ पश्चिमी हिस्से में भी कई स्थानों पर तेज बारिश होने के आसार हैं।
बारिश हुई, फिर भी प्रदेश में तीन इंच की कमी
प्रदेश में अब तक 629.8 मिलीमीटर यानी करीब 24.8 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 707.3 मिलीमीटर यानी 27.8 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में करीब 3 इंच पानी कम गिरा है और कुल बारिश सामान्य से 11 प्रतिशत कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी करीब 8 प्रतिशत, जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी 14 प्रतिशत तक है।
39 जिलों में बारिश का आंकड़ा अब भी पीछे
प्रदेश के 39 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें कई जिलों में कमी 6 से 50 प्रतिशत तक है। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से पीछे है। पश्चिमी हिस्से में भी कई जिलों में 1 से 48 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई है। यानी मौजूदा तेज बारिश के बावजूद मानसून की शुरुआती कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है।
अब भी प्रदेश में औसत 3 इंच बारिश कम
मौसम विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसतन 629.8 मिलीमीटर यानी करीब 24.8 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। सामान्य तौर पर इतने समय में प्रदेश में 707.3 मिलीमीटर यानी 27.8 इंच बारिश होनी चाहिए। इस हिसाब से प्रदेश में सामान्य से करीब 3 इंच बारिश कम रिकॉर्ड हुई है। वहीं, बारिश सामान्य से 11 प्रतिशत कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी करीब 8 फीसद है, जबकि पश्चिमी हिस्से में ये कमी 14 फीसद है।
39 जिलों में कम तो 16 जिलों में औसत से अधिक वर्षा
प्रदेश के 39 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। जबकि 16 जिलों में मानसून मेहरबान है। जिन जिलों में कम बारिश हुई वहां कमी 6 से 50 फीसद है। इनमें जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से पीछे है। पश्चिमी हिस्से में भी कई जिलों में 1 से 48 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई है। यानी मौजूदा समय में जारी बारिश के बावजूद मानसून की शुरुआती कमी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वहीं, दूसरी तरफ जिन जिलों में बारिश औसत से ज्यादा हुई, उनमें अनूपपुर, डिंडोरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ शामिल हैं।
16 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी
प्रदेश के कुछ जिलों में मानसून मेहरबान भी रहा है। अनूपपुर, डिंडोरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
जुलाई ने संभाला, जून की कमी अभी बाकी
जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई में मानसून सक्रिय होने के बाद बारिश का आंकड़ा सुधरा और महीने का कोटा पूरा हो गया। इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आया, जिससे कई दिनों तक बारिश कमजोर रही। अगस्त के अंतिम दौर में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम ने फिर बारिश बढ़ाई है, लेकिन जून की कमी अभी पूरी तरह नहीं भर पाई है।
37.3 इंच है प्रदेश की सामान्य बारिश
मध्य प्रदेश में पूरे मानसून सीजन की सामान्य बारिश करीब 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के आसपास रहती है। ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश प्रदेश के कुल वर्षा आंकड़े को सामान्य के करीब लाने में अहम भूमिका निभा सकती है।




