
राजस्व कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में होगी कड़ी कार्रवाई
भोपाल
राजस्व के कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में जिला स्तर पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। विभिन्न जिलों में रिश्वत के आरोपी पटवारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है। यह कार्रवाई लोकायुक्त में दर्ज शिकायत, जांच में सामने आए तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
सतना के पटवारी संतोष सतनामी के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति जारी, नामांतरण-बंटवारे के लिए 15 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप
सतना जिले की तहसील रामपुर बघेलान के हल्का क्रमांक-17 डेंगराहट में पदस्थ तत्कालीन पटवारी संतोष सतनामी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है। कलेक्टर सतना के आदेश के अनुसार नामांतरण एवं बंटवारे के प्रकरण के निराकरण में तत्कालीन पटवारी संतोष सतनामी द्वारा 15 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई और 5 हजार रुपये नकद लेते हुए ट्रैप की कार्रवाई की गई।
जारी आदेशानुसार पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त रीवा से प्राप्त प्रतिवेदन, एफआईआर, शिकायत, साक्षियों के कथन, जप्ती एवं विभिन्न पंचनामों तथा अन्य उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद प्रकरण प्रथम दृष्टया अभियोजन योग्य पाया गया। इसके आधार पर हल्का क्रमांक-17 डेंगराहट, तहसील रामपुर बघेलान, जिला सतना के तत्कालीन पटवारी संतोष सतनामी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7, 13(1)(बी) एवं 13(2) के तहत अभियोजन संस्थित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
चार बीघा भूमि के नामांतरण के लिए 15 हजार रुपये रिश्वत मांगने वाले जबलपुर के पटवारी सनी द्विवेदी के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति जारी
जबलपुर जिले की तहसील कुंडम के हल्का क्रमांक-04 में पदस्थ पटवारी सनी द्विवेदी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है।अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सिहोरा द्वारा जारी आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत पिपरिया के ग्राम मझौली में आवेदक के पिता की चार बीघा भूमि के नामांतरण के लिए तहसीलदार कुंडम के समक्ष पटवारी सनी द्विवेदी के माध्यम से शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था। नामांतरण के लिए पटवारी द्वारा 15 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई।
आवेदक द्वारा लोकायुक्त जबलपुर में शिकायत की गई। रिश्वत मांगने संबंधी बातचीत रिकॉर्ड की गई, जिसमें आरोपी द्वारा 13 हजार रुपये लेने पर सहमति व्यक्त की गई। इसके बाद लोकायुक्त द्वारा ट्रैप कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान पटवारी को 13 हजार रुपये की रिश्वत राशि प्राप्त करते हुए पकड़ा गया। रिश्वत राशि एवं अन्य सामग्री जब्त कर आवश्यक कार्रवाई की गई।
जांच के दौरान आवेदक, पंच साक्षियों, ट्रैप दल एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के कथन लिए गए। राज्य फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी, सागर द्वारा की गई आवाज की जांच में रिकॉर्ड की गई बातचीत की आवाज का मिलान आरोपी के प्रमाणित आवाज नमूने से पाया गया। जांच में 15 हजार रुपये रिश्वत की मांग एवं 13 हजार रुपये प्राप्त किए जाने की पुष्टि होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1)(बी) एवं 13(2) के तहत अपराध प्रमाणित पाया गया। इसके आधार पर अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है।
नर्मदापुरम के पटवारी देवेंद्र सहारिया के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति जारी
नर्मदापुरम जिले की तहसील नर्मदापुरम में पदस्थ पटवारी (नगर सर्वेक्षक) देवेंद्र सहारिया के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है।अनुविभागीय अधिकारी राजस्व नर्मदापुरम द्वारा जारी आदेश के अनुसार पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त भोपाल संभाग द्वारा अभियोजन स्वीकृति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
आदेश में नवीन भू-अभिलेख नियम 2020 के नियम 10 के अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आरोपी को पद से हटाने के लिए सक्षम प्राधिकारी होना उल्लेखित है। उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों के परीक्षण के बाद पटवारी (नगर सर्वेक्षक), तहसील नर्मदापुरम, जिला नर्मदापुरम देवेंद्र सहारिया के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 और धारा 13(1) सहपठित धारा 13(2) के तहत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है।
भूमि नामांतरण के लिए 8 हजार रुपये रिश्वत मांगने वाले सीहोर के पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति जारी
सीहोर जिले की तहसील जावर के पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है। शिकायतकर्ता द्वारा लोकायुक्त में शिकायत की गई थी कि भूमि नामांतरण के लिए पटवारी द्वारा 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई है। शिकायत के सत्यापन के लिए निरीक्षक मुकेश तिवारी द्वारा डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर उपलब्ध कराया गया। रिकॉर्ड की गई बातचीत में पटवारी द्वारा 8 हजार रुपये लेने पर सहमति व्यक्त की गई।
स्वतंत्र पंच साक्षियों की उपस्थिति में रिकॉर्ड की गई बातचीत का अवलोकन किया गया तथा प्रारंभिक पंचनामा तैयार किया गया। इसके बाद जावर में ट्रैप कार्रवाई की गई, जिसमें रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई। तहसील कार्यालय जावर में वॉइस रिकॉर्डर एवं मेमोरी कार्ड की जब्ती का पंचनामा तैयार कर उसे सीलबंद किया गया। आरोपी के आवाज के नमूने को एफएसएल भोपाल भेजा गया, जहां रिकॉर्ड की गई आवाज को पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर की आवाज प्रमाणित किया गया।
हल्का क्रमांक-24, तहसील जावर, जिला सीहोर के पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर द्वारा लोक सेवक के पद का दुरुपयोग करते हुए भूमि नामांतरण के लिए 8 हजार रुपये रिश्वत की मांग किए जाने के संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया। उपलब्ध तथ्यों एवं अभिलेखों के परीक्षण के बाद कलेक्टर सीहोर श्री बालगुरु के. द्वारा अभियोजन के लिए पर्याप्त आधार पाए जाने पर अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है।
मकान के फर्जी नामांतरण एवं लीज रिन्यू के एवज में 8 हजार रुपये रिश्वत लेने वाले भोपाल के पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति जारी
भोपाल जिले में कोलार क्षेत्र के पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल के विरुद्ध विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त भोपाल में दर्ज मामले में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है। पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल पर मकान के फर्जी नामांतरण एवं लीज रिन्यू के एवज में 8 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त भोपाल द्वारा उन्हें रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के बाद कार्रवाई की गई।
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों का परीक्षण कर कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही एवं भ्रष्टाचार में प्रथम दृष्टया संलिप्तता के आधार पर अभियोजन स्वीकृति के लिए प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी भोपाल श्री प्रियंक मिश्रा द्वारा प्रकरण से संबंधित तथ्यों एवं अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद लागू विधिक प्रावधानों के तहत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है।
राज्य सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासन में पारदर्शिता एवं शुचिता बनाए रखने के लिए अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में निरंतर कार्रवाई की जा रही है।




