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दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर सख्ती, 5 से 20 नवंबर तक वर्क फ्रॉम होम; निर्माण कार्यों पर भी रोक

नई दिल्ली
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को रोकने और उसे नियंत्रित करने के लिए कई उपाय लागू किए जा रहे हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली और एनसीआर के पांच जिलों में सरकारी और निजी कार्यालयों को निर्देश दिया है कि 5 नवंबर से 20 नवंबर तक वे अपने 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ ही काम करें, जबकि बाकी 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करें। आयोग ने इसी अवधि के दौरान पूरे एनसीआर में धूल उड़ाने वाले विध्वंस और बाहरी निर्माण कार्यों पर भी रोक लगा दी है। हालांकि, जरूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं को इस रोक से छूट दी गई है।

30 अक्टूबर के अपने एक आदेश में CAQM ने कहा है कि दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद तथा गौतम बुद्ध नगर जिलों में सरकारी और निजी कार्यालय अपने कुल कर्मचारियों में से अधिकतम 50 प्रतिशत के साथ ही काम करें, और बाकी कर्मचारी घर से काम करें। यह नियम उन औद्योगिक इकाइयों और आवश्यक सेवाओं पर लागू नहीं होगा, जहां इस तरह की व्यवस्था संभव नहीं है।

आयोग ने आगे निर्देश दिया कि पूरे एनसीआर में ऐसी तोड़फोड़ और बाहरी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई जाए, जिनसे धूल उड़ती हो। इस रोक के दायरे में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं भी आएंगी, जिनमें राजमार्ग, सड़कें, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली ट्रांसमिशन लाइनें, पाइपलाइन और दूरसंचार से जुड़े काम शामिल हैं। हालांकि, रेलवे, मेट्रो सेवाओं, हवाई अड्डों, अंतर-राज्य बस टर्मिनलों, अस्पतालों, जलापूर्ति और स्वच्छता, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़ी गतिविधियों तथा राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को इस रोक से छूट दी गई है।

इन एहतियाती उपायों के पीछे की वजह बताते हुए CAQM ने 2018 से 2025 तक नवंबर महीने के ऐतिहासिक दैनिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) आंकड़ों का हवाला दिया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली-एनसीआर में खासकर नवंबर की शुरुआत से मध्य तक प्रदूषण का स्तर बार-बार काफी बढ़ जाता है। आदेश में कहा गया है कि इस दौरान, स्थानीय उत्सर्जन स्रोतों, मौसमी कृषि अवशेषों और बायोमास को जलाने तथा अन्य घटनाओं से होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण के स्तर को और बढ़ा देता है। वहीं, प्रतिकूल मौसमी स्थितियां जैसे हवा की धीमी गति, वायुमंडलीय सीमा परत का कम होना और हवा का वर्टिकल मिक्सिंग कम होना प्रदूषकों के फैलाव को और सीमित कर देती हैं।

CAQM ने ये निर्देश 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021' की धारा 12 के तहत जारी किए हैं। यह अधिनियम आयोग को एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की सुरक्षा और सुधार के लिए कदम उठाने का अधिकार देता है। आयोग ने गौर किया कि जांच की अवधि के दौरान कुछ दिनों में AQI का स्तर 'गंभीर' और 'अत्यंत गंभीर' श्रेणियों तक पहुंच गया था।

इसमें कहा गया है कि इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों पर ही उत्सर्जन को कम करना और उन अवधियों के दौरान जब ऐतिहासिक रूप से प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक रहता है, प्रदूषकों के जमाव को न्यूनतम करना है। आदेश में कहा गया है कि प्रस्तावित उपाय एहतियाती प्रकृति के हैं, जो एक निश्चित अवधि और भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित हैं। इन्हें इस बात को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है कि यह क्षेत्र मौसमी रूप से वायु प्रदूषण के प्रति कितना संवेदनशील है।

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