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प्रतीक यादव मौत मामले में मानवाधिकार आयोग की एंट्री, शरीर पर चोट के निशानों ने बढ़ाया संदेह

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और भाजपा नेत्री अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) पहुंच गया है। डीके फाउंडेशन ऑफ फ्रीडम एंड जस्टिस ने आयोग के अध्यक्ष को याचिका भेजकर इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। इसमें कहा गया है कि प्रतीक के शरीर पर मिले चोट के निशान घटना को संदिग्ध बना रहे हैं।

फाउंडेशन के अध्यक्ष दानिश खान ने अपनी याचिका में दलील दी है कि हालांकि प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण 'हृदय गति रुकना' (हार्ट अटैक) बताया जा रहा है, लेकिन मृतक के शरीर पर पाए गए चोट के निशान और इस घटना की अचानक प्रकृति कई गंभीर संदेह पैदा करती है। याचिका में कहा गया है कि प्रतीक यादव अपनी फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के लिए जाने जाते थे, ऐसे में उनकी अचानक मृत्यु और शरीर पर मौजूद संदिग्ध निशानों की निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।

संस्था ने आयोग से अनुरोध किया है कि मामले से जुड़े तमाम साक्ष्यों, विशेषकर घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज को तत्काल सुरक्षित किया जाए। फाउंडेशन ने अंदेशा जताया है कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है, इसलिए उन्होंने विसरा रिपोर्ट की निगरानी भी विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल से कराने की मांग की है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोटों के छह निशान मिले

प्रतीक यादव के पोस्टमार्टम में छह सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म यानी फेफड़े की मुख्य नस में खून का बड़ा थक्का फंस गया। इससे सांस और दिल की कार्यप्रणाली बंद होने से प्रतीक की सांसें थम गईं। चिकित्सा विज्ञान में इसे कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स कहते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक प्रतीक के शरीर पर छह चोटें थीं। चार चोटें दाएं हाथ पर कोहनी से कलाई तक थीं। एक चोट छाती के दाईं तरफ थी। एक चोट बाईं कलाई पर थी। सभी चोटें गिरने से लगने की आशंका है। हालांकि यह भी कहा गया है कि कोई भी चोट ऐसी नहीं है, जिससे मौत हो सके।

प्रतीक की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए वीडियोग्राफी के बीच कराए गए पोस्टमार्टम के दौरान विशेषज्ञों ने सभी पहलुओं को देखा। विस्तृत जांच के लिए आस-पास की कोशिकाओं को सुरक्षित रखा गया है, ताकि माइक्रोस्कोप से विस्तार से जांच की जा सके। सुरक्षित रखे गए विसरा से शरीर में दवा या रसायन का पता लगाया जाएगा।
शरीर पर कहां-कहां मिलीं चोटें

  • -पहली चोट छाती के सामने दाहिनी तरफ है। यह गहरी चोट थी, जिसका रंग बीच में लाल-भूरा और किनारों पर हरा-पीला बताया गया। चोट के नीचे खून जमने के निशान भी मिले।
  • -दूसरी चोट दाहिने हाथ के पीछे और अंदरूनी हिस्से में, बगल के नीचे पाई गई। इसमें भी लाल-भूरे और हरे-पीले रंग के निशान मिले।
  • -तीसरी चोट दाहिने फोरआर्म के अंदरूनी हिस्से में कोहनी से कलाई तक फैली हुई थी। इस चोट के नीचे भी रक्तस्राव के निशान मिले।
  • -चौथी चोट दाहिने फोरआर्म में कोहनी के पास थी।
  • -पांचवीं चोट दाहिनी कोहनी के पीछे बाहरी हिस्से में दर्ज की गई।
  • -छठी चोट बाएं हाथ की कलाई के ऊपरी हिस्से पर मिली।

पुरानी और नई चोटों का भी जिक्र

रिपोर्ट में डॉक्टरों ने चोटों के समय का भी अनुमान लगाया है। तीन चोटें पांच से सात दिन पुरानी हैं और तीन लगभग एक दिन पुरानी मानी गई हैं।

 

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