
ईरान के फैसले से पाकिस्तान में पेट्रोलियम संकट? LPG और तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
इस्लामाबाद
अमेरिका के दबाव और सीमा पर बढ़ती परेशानियों के बीच पाकिस्तान और ईरान के रिश्तों में नई मुश्किलें सामने आ रही हैं. कुछ महीने पहले तो हालात ये थे कि पाकिस्तान ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने में आगे-आगे घूम रहा था लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं. खासतौर पर जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच अलग ही मोर्चा खुल गया, तो पाकिस्तान को समझ ही नहीं आने लगा कि वो किस तरफ जाए।
इसी बीच सऊदी अरब से दोस्ती निभाने के चक्कर में पाकिस्तान ने अपने ईरान बॉर्डर को बंद कर दिया और व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ. पहले तो ईरान ने इसे बातचीत से सुलझाने की बात कही लेकिन अब उसने ईरान से आने वाली रसोई गैस (LPG) की सप्लाई रोक दी है. ऐसे में पाकिस्तान की अवाम की रसोई में महंगाई की आग लग गई है. पहले से ही महंगे गैस सिलेंडर अब और भी ज्यादा महंगे हो गए हैं।
पाकिस्तान में 7000 रुपये में एक सिलेंडर
ईरान की ओर से एलपीजी रुकने से पाकिस्तान में संकट गहराने लगा है. महज कुछ दिनों में 12 किलो के LPG सिलेंडर की कीमत 4500 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर करीब 7000 रुपये पहुंच गई है. कारोबारियों को आशंका है कि अगर सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं. दरअसल पाकिस्तान के लिए ईरान से LPG की आपूर्ति बेहद अहम है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान हर दिन ईरान से करीब 7,000 टन LPG आयात करता है. सीमा बंद होने से गैस से भरे सैकड़ों ट्रक फंस गए हैं और बाजार में कमी का दबाव बढ़ रहा है।
17 अक्टूबर को बंद हुए बॉर्डर के रास्ते
पाकिस्तान ने 17 अक्टूबर को ईरान के साथ गबद-रिमदान और तफ्तान सीमा मार्गों से व्यापार रोक दिया था. पाकिस्तान के अधिकारियों ने इसके पीछे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, तस्करी रोकने और सीमा प्रबंधन सुधारने की वजह बताई।
वहीं ईरान ने सीमा पर तकनीकी समस्याओं और एहतियाती कदमों का हवाला दिया. ऐसे में सीमा बंद करने के कारणों को लेकर दोनों देशों के बयानों में अंतर दिखाई देता है. सीमा बंद होने का असर सिर्फ गैस तक सीमित नहीं है।
रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के आलू, केले और चावल से भरे एक हजार से ज्यादा कंटेनर भी फंस गए थे. सैकड़ों ट्रकों की आवाजाही प्रभावित हुई. गबद-रिमदान मार्ग पर पाकिस्तानी खराब होने वाले सामान के निर्यात को दोबारा अनुमति मिली, लेकिन LPG का आयात बाधित रहा।
क्या अमेरिका के दबाव में उठाया गया कदम?
इस पूरे मामले में अमेरिका की भूमिका भी चर्चा में है. वॉशिंगटन लंबे समय से ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए दबाव बना रहा है. पाकिस्तान के सामने मुश्किल यह है कि उसे अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंध भी बनाए रखने हैं और ईरान से होने वाले व्यापार को भी बचाना है. 23 अक्टूबर को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश लागू अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन करता है. हालांकि इस्लामाबाद ने यह स्पष्ट रूप से स्वीकार नहीं किया कि सीमा बंद करने का फैसला अमेरिकी दबाव में लिया गया था।




