
प्रांतीय शिविर में आर्यवीरों का हुआ यज्ञोपवीत संस्कार
टीम एक्शन इंडिया
दलबीर मलिक
कुरुक्षेत्र: गुरुकुल में चल रहे प्रान्तीय आर्यवीर दल शिविर में आज सभी आर्यवीरों का यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न हुआ। आचार्य दयाशंकर शास्त्री जी के मार्गदर्शन वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सभी आर्यवीरों ने जनेऊ धारण किया। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत के ये तीन धागे हमें अपने देवों के प्रति, हमारे ऋषियों के प्रति तथा हमारे माता-पिता के प्रति हमारे जो ऋण, कत्र्तव्य और दायित्व हैं उनका स्मरण कराते हैं।
पहला ऋण माता-पिता का ऋण है, दूसरा ऋण गुरुओं का ऋण है तथा तीसरा ऋण ऋषि ऋण होता है, हमें इन तीनों ऋणों से उऋण होने के लिए अच्छे आचरण और उत्तम कार्य करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत धारण करने वाले युवा भाग्यशाली है, यह कोई मामूली धागा नहीं है मुगलकाल में वीर हकीकत राय ने वैदिक धर्म निभाते हुए अपने जीवन का बलिदान कर दिया था। उन्होंने चोटी और यज्ञोपवीत उतारने की बजाए अपने प्राणों की आहूति दे दी थी इसलिए वैदिक संस्कृति में यज्ञोपवीत का बड़ा महत्त्व है।
यज्ञोपवीत संस्कार के उपरान्त सभी आर्यवीरों ने समाज से पाखण्ड, अंधविश्वास आदि बुराइयों को मिटाने का संकल्प लिया। इस दौरान युवाओं ने भारी संख्या में हाथों व गले में पहने हुए काले धागे, कंडे-ताबीज आदि उतारकर पांखण्ड से दूर रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर भजनोपदेशक महाशय जयपाल आर्य, प्रचार प्रमुख विशाल आर्य, वरिष्ठ योग शिक्षक सूर्यदेव आर्य, व्यायाम शिक्षक संदीप वैदिक, अमित आर्य, सोहनवीर आर्य, नरेश आर्य, महावीर आर्य, सुरेन्द्र आर्य, आर्यमित्र आर्य सहित सभी प्रशिक्षक मौजूद रहे।


