दिल्ली

अधिकारोंपर हो रहे कुठाराघात पर कई संगठन हुए एकजुट

टीम एक्शन इंडिया
नई दिल्ली: दिल्ली के राजेंद्र भवन में एनडीए सरकार द्वारा लगातार पिछले दस सालो से नागरिक अधिकारों पर हो रहे हमलों को लेकर पीपुल्स यूनियन फार सिविल लिबर्टीज की दिल्ली यूनिट ने देश की जनता के नागरिक एवं मानव अधिकारों के लिए संघर्षित विभिन्न संगठनों को एकजुट होने की अपील करते हुए एक सेमिनार का आयोजन किया।

इसकी अध्यक्षता दिल्ली के अध्यक्ष वरिष्ठ एडवोकेट एनडी पंचोली ने की तथा जोरदार संचालन वरिष्ठ एडवोकेट तेजेन्द्र सिंह आहूजा, महासचिव एवं सचिव अमित श्रीवास्तव ने किया। सभी वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए विस्तार से तीन नए अपराधिक कानूनों को नागरिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया।

कृषि कानूनों को मानकर भी भूल जाना, भ्रष्टाचार के नाम पर ईडी, सीबीआई, एनआईए का विपक्ष पर मनमाना दुरुपयोग, तत्थों पर आधारित इतिहास को बदलकर मनमानी करना, सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओ को देशद्रोह के नाम पर हजारों निदोर्षों को ताउम्र जेल में सडाना, सभी धर्म को अलग-थलग करना, महिलाओं पर अत्याचार, जहरीले भाषण, आंदोलन पर कटाक्ष ,जातीय दंगों में सुलगते मणिपुर की उपेक्षा, चुनाव सुधार की आवश्यकता, देश की गिरती अर्थ व्यवस्था आदि मुद्दों पर खुलकर विचार विमर्श हुए।

इनसे निजात पाने हेतु मौजूद सभी संगठनों ने पीयूसीएल की अपील पर कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग देने का आह्वान किया। इनमें इन मुद्दों पर पीपुल्स यूनियन फार सिविल लिबर्टीज की अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने एक प्रस्ताव रखा जिसका सभी ने करतल ध्वनि से स्वागत कर पारित किया।

इस सेमिनार में पूर्व जस्टिस, दिल्ली हाई कोर्ट जसपाल, प्रोफेसर रामानुजम, पूर्व वाइस चांसलर ईग्नू, प्रमुख अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरूण कुमार, सरदार दया सिंह, गुडगांव, एडवोकेट डब्ल्यू आर खान, संयुक्त किसान मोर्चा से प्रबल प्रताप, डॉक्टर नीलम, एडीआर से जगदीप छोकर, क्रांतिकारी महिला संगठन से पूनम कौशिक, पीपुल्स यूनियन फार डेमोक्रेटिक राइट, हरीश नागर, सुमेधा, अशोक भारती, एडवोकेट रमेश, नागरिक अधिकार आंदोलन से राज व्रतआर्य, डॉ. एस डी सेठी आदि उपस्थित रहे।

 

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