
स्व. अटल जी की स्मृतियां मध्यप्रदेश की माटी में आज भी जीवंत हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल
भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को कृतज्ञ राष्ट्र ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शौर्य स्मारक के पास स्थापित स्व. अटल जी आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. अटल जी का मध्यप्रदेश से आत्मीय और गहरा रिश्ता रहा है। मध्यप्रदेश उनकी जन्मभूमि होने के साथ उनकी कर्मभूमि होने से भी भावनात्मक रूप से जुड़ा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल जी एक महान राजनेता थे। वे भारत की लोकतांत्रिक चेतना, राष्ट्रभक्ति और मानवीय संवेदनाओं के ऐसे प्रतीक थे, जिनका व्यक्तित्व राजनीति की सीमाओं से कहीं बड़ा था। मध्यप्रदेश की माटी को गर्व है कि उसने अटल जी जैसे युगपुरुष को जन्म दिया। ग्वालियर की गलियों से निकली उनकी आवाज ने देश ही नहीं, पूरी दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया। उन्होंने कहा कि स्व. अटल जी का व्यक्तित्व सहजता, संवेदनशीलता, राष्ट्र के प्रति समर्पण और उत्कृष्ट वक्तृत्व का अद्भुत संगम था। उनके विचारों और जीवन मूल्यों ने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी। वे सत्ता को साध्य नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का माध्यम मानते थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल जी की स्मृतियां, प्रतिमाओं और स्मारकों में ही नहीं, मध्यप्रदेश के जन-जन के मन में जीवित हैं। ग्वालियर की गलियों से लेकर देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच तक उनकी यात्रा हमें यह प्रेरणा देती है कि साधारण परिवेश से उठकर भी असाधारण संकल्प के साथ राष्ट्र के भविष्य को नई दिशा दी जा सकती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल जी की वाणी में ओज था, उनके व्यवहार में विनम्रता, विचारों में दृढ़ता थी तो लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरा सम्मान। उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। वे सदैव संवाद से समस्या समाधान के पक्षधर रहे। उनका जीवन और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रहित, सुशासन और जनसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।
इस अवसर पर सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवान दास सबनानी, महापौर मालती राय, समाजसेवी डॉ. महेंद्र सिंह, राहुल कोठारी, रविन्द्र यति, आशीष अग्रवाल एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।




